धृतराष्ट्रस्य मूर्च्छा तथा द्रोणविषयकप्रश्नाः
Dhṛtarāṣṭra’s Fainting and Questions Concerning Droṇa
पुरस्तात् के च वीरस्य युध्यमानस्य संयुगे | के च तस्मिंस्तनूंस्त्यकत्वा प्रतीपं मृत्युमाव्रजन्,कौन वीर उन महात्माके दाहिने पहियेकी और कौन बायें पहियेकी रक्षा करते थे? कौन उस युद्धस्थलमें युद्धपरायण वीरवर द्रोणाचार्यके आगे थे और किन लोगोंने अपने शरीरका मोह छोड़कर विपक्षियोंका सामना करते हुए उस रणक्षेत्रमें मृत्युका वरण किया था
purastāt ke ca vīrasya yudhyamānasya saṃyuge | ke ca tasmiṃs tanūṃs tyaktvā pratīpaṃ mṛtyum āvrajan |
دھرتراشٹر نے کہا—جنگ کے گھمسان میں لڑتے ہوئے اُس سورما کے آگے کون کھڑا تھا؟ اے بزرگ! اُس کے دائیں پہیے کی نگہبانی کون کرتا تھا اور بائیں کی کون؟ اور کون لوگ جسم کی محبت ترک کر کے مخالفین کے سامنے ڈٹ گئے اور اسی میدان میں موت کو پہنچے؟
धृतराष्ट उवाच