अध्याय ८० — मध्यंदिन-रणवृत्तान्तः
Yudhiṣṭhira–Śrutāyu encounter; Cekitāna–Gautama clash; Abhimanyu pressure; Arjuna’s redeployment
त॑ याम सर्वे महता बलेन मा वो रिपु: प्रार्थथतामनीकम् । वह महान् संघर्ष आरम्भ होनेपर आपका पुत्र दुर्योधन भाइयोंके पास आकर बोला --“यह दुरात्मा ट्रुपदपुत्र आकर भीमसेनसे मिल गया है। हम सब लोग बहुत बड़ी सेनाके साथ इसपर आक्रमण करें, जिससे हमारा और तुम्हारा यह शत्रु हमलोगोंकी इस सेनाको हानि पहुँचानेका विचार न कर सके' || ४० है || श्रुत्वा तु वाक््यं तममृष्यमाणा ज्येष्ठाज्ञया नोदिता धार्तराष्ट्रा:,दुर्योधनका यह कथन सुनकर आपके सभी वीर पुत्र, जो धृष्टद्यम्मका आगमन नहीं सह सके थे, बड़े भाईकी आज्ञासे प्रेरित हो प्रलयकालके भयंकर केतुओंकी भाँति हाथमें आयुध लिये धृष्टद्युम्नके वधके लिये उनपर टूट पड़े। उन्होंने अपने हाथोंमें धनुष-बाण ले रखे थे और वे रथके पहियोंकी घरघराहटके साथ-साथ धनुषकी प्रत्यंचाको भी कँपाते हुए उसकी टंकार फैला रहे थे
sañjaya uvāca | taṃ yāma sarve mahatā balena mā vo ripuḥ prārthayatām anīkam | śrutvā tu vākyaṃ tam amṛṣyamāṇā jyeṣṭhājñayā noditā dhārtarāṣṭrāḥ ||
سنجے نے کہا—دُریودھن بولا: “ہم سب بڑے زور کے ساتھ اس پر چڑھ دوڑیں؛ دشمن کو ہمارے لشکری آرایش میں رخنہ ڈھونڈنے نہ دو۔” دُریودھن کی بات سن کر، دھृष्टدیومن کی آمد برداشت نہ کر سکنے والے دھرتراشٹر کے بیٹے، بڑے بھائی کے حکم سے ابھارے گئے، ہاتھوں میں ہتھیار لیے قیامتِ زمانہ کے ہولناک عَلَموں کی مانند، دھृष्टدیومن کے قتل کے لیے اس پر ٹوٹ پڑے۔ کمانیں اور تیر تھامے وہ رتھ کے پہیوں کی گرج کے ساتھ کمان کی ڈوری کو لرزاتے اور تیز ٹنکار میدان میں پھیلاتے چلے گئے۔
संजय उवाच