मेरोर्दिग्वर्णनम् / Digvarṇana of Meru: Uttara-Kuru, Bhadrāśva, and Jambūdvīpa Motifs
सृजते च पुन: सर्व विद्यते नेह शाश्वतम् । नरो नारायणश्चैव सर्वज्ञ: सर्वभूतहृत्,“फिर वही सबकी सृष्टि करता है। यहाँ कुछ भी सदा स्थिर रहनेवाला नहीं है। भगवान् नर और नारायण समस्त प्राणियोंके सुहृद् एवं सर्वज्ञ हैं। देवता उन्हें वैकुण्ठ और मनुष्य उन्हें शक्तिशाली विष्णु कहते हैं!
sṛjate ca punaḥ sarvaṃ vidyate neha śāśvatam | naro nārāyaṇaś caiva sarvajñaḥ sarvabhūtahṛt ||
وہی پھر سب کی تخلیق کرتا ہے؛ اس دنیا میں کچھ بھی دائمی نہیں۔ بھگوان نر اور نارائن—سب کچھ جاننے والا اور تمام جانداروں کا خیرخواہ—ہیں۔
वैशम्पायन उवाच