भीष्मविक्रमदर्शनं तथा क्रौञ्चारुणव्यूहविधानम् | Bhīṣma’s Ascendancy and the Organization of the Krauñcāruṇa Formation
यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम् । स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धि विन्दति मानव:,जिस परमेश्वरसे सम्पूर्ण प्राणियोंकी उत्पत्ति हुई है और जिससे यह समस्त जगत् व्याप्त है, उस परमेश्वरकी अपने स्वाभाविक कर्मोद्वारा पूजा करकेः मनुष्य परम सिद्धिको प्राप्त हो जाता हैः
جس پرمیشور سے تمام جانداروں کی پیدائش ہے اور جس سے یہ سارا جہان محیط ہے—اسی کی اپنے ہی عمل کے ذریعے عبادت کر کے انسان سِدھی پاتا ہے۔
अजुन उवाच