Abhimanyu’s Assault on Bhīṣma’s Screen; Banner-Felling and Reinforcements (सौभद्र-भीष्म-समरः)
श्रीभगवानुवाच त्रिविधा भवति श्रद्धा देहिनां सा स्वभावजा) | सात्त्विकी राजसी चैव तामसी चेति तां शृणु,श्रीभगवान् बोले--मनुष्योंकी वह शास्त्रीय संस्कारोंसे रहित केवल स्वभावसे उत्पन्न श्रद्धा सात्विकी और राजसी तथा तामसी-ऐसे तीनों प्रकारकी ही होती है। उसको तू मुझसे सुन
شری بھگوان نے فرمایا— اے ارجن! جسم رکھنے والوں کی فطرت سے پیدا ہونے والی شردھا تین طرح کی ہوتی ہے: ساتتوِکی، راجسی اور تامسی۔ اب اسے مجھ سے سن۔
अजुन उवाच