ध्यानयोगः — Dhyāna-Yoga
Discipline of Meditation and Mental Restraint
सम्बन्ध-- इस प्रकार श्रोताके अन्तःकरणमें रुचि और श्रद्धा उत्पन्न करनेके लिये कर्मतत्वको गहन एवं उसका जानना आवश्यक बतलाकर अब अपनी प्रतिज्ञाके अनुसार भगवान् कर्मका तत्त्व समझाते हैं-- कर्मण्यकर्म य: पश्येदकर्मणि च कर्म य: । स बुद्धिमान मनुष्येषु स युक्त: कृत्स्नकर्मकृत्,जो मनुष्य कर्ममें अकर्म देखता है और जो अकर्ममें कर्म देखता है, वह मनुष्योंमें बुद्धिमान है और वह योगी समस्त कर्मोंको करनेवाला हैः
karmaṇy akarma yaḥ paśyed akarmaṇi ca karma yaḥ | sa buddhimān manuṣyeṣu sa yuktaḥ kṛtsna-karma-kṛt ||
جو شخص عمل کے اندر بےعملی کو دیکھے اور بےعملی کے اندر عمل کو دیکھے، وہی انسانوں میں دانا ہے؛ وہی یوگ میں یُکت ہے، اور وہی تمام اعمال کو انجام دے چکا (کرتسن کرم کرت) سمجھا جاتا ہے۔
अजुन उवाच