कर्मयोग–ज्ञानयज्ञ–अवतारोपदेश
Karma-Yoga, Jñāna-Yajña, and Avatāra Instruction
सम्बन्ध-- पहले भगवान् आत्माकी नित्यता और निर्विकारताका प्रतिपादन करके आत्मदृष्टिसे उनके लिये शोक करना अनुचित सिद्ध करते हैं-- न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपा: । न चैव न भविष्याम: सर्वे वयमत: परम्,न तो ऐसा ही है कि मैं किसी कालमें नहीं था या तू नहीं था अथवा ये राजालोग नहीं थे और न ऐसा ही है कि इससे आगे हम सब नहीं रहेंगे
na tv evāhaṁ jātu nāsaṁ na tvaṁ neme janādhipāḥ | na caiva na bhaviṣyāmaḥ sarve vayam ataḥ param ||
یہ ہرگز نہیں کہ کسی زمانے میں میں نہ تھا، یا تو نہ تھا، یا یہ حکمران نہ تھے؛ اور یہ بھی نہیں کہ آئندہ ہم سب نہ رہیں گے۔
संजय उवाच