धनं दत्त्वा विसृज्यन्तां पूजयित्वा चिकित्सका: । एवंगते मयेदानीं वैद्ये: कार्यमिहास्ति किम्,उन्हें देखकर गंगानन्दन भीष्मने आपके पुत्र दुर्योधनसे कहा--'वत्स! इन चिकित्सकोंको धन देकर सम्मानपूर्वक विदा कर दो। मुझे यहाँ इस अवस्थामें अब इन वैद्योंसे क्या काम है?
ان طبیبوں کو مال دے کر، عزت و تکریم کے ساتھ رخصت کر دو۔ میری حالت ایسی ہو چکی ہے؛ اب یہاں مجھے اِن حکیموں سے کیا کام؟
संजय उवाच