युद्धसंग्रहः
Kurukṣetra Campaign in Summary
वर्तमाने महाराज महे रैवतकस्य च । उपायात् पुण्डरीकाक्षो युयुधानानुगस्तदा,मार्गमें अनेकानेक सरोवरों, सरिताओं, वनों और पर्वतोंको लाँधकर वे परम रमणीय द्वारका नगरीमें जा पहुँचे। महाराज! उस समय वहाँ रैवतक पर्वतपर कोई बड़ा भारी उत्सव मनाया जा रहा था। सात्यकिको साथ लिये कमलनयन भगवान् श्रीकृष्ण भी उस समय उस महोत्सवमें पधारे
vaiśampāyana uvāca |
vartamāne mahārāja mahe raivatakasya ca |
upāyāt puṇḍarīkākṣo yuyudhānānugas tadā ||
ویشَمپاین نے کہا—اے مہاراج! جب رَیوَتک پہاڑ پر وہ عظیم جشن برپا تھا، تب یُیُدھان (ساتیَکی) کے ہمراہ پُندریکاکش (شری کرشن) وہاں آ پہنچے۔
वैशम्पायन उवाच