कर्मनाशाभावः, गर्भे जीवप्रवेशः, आचारधर्मोपदेशः
Karma’s Non-Extinction, Jīva’s Entry into the Embryo, and Instruction on Conduct-Dharma
सौक्ष्म्यादव्यक्तभावाच्च न च क्वचन सज्जति | सम्प्राप्य ब्राह्मण: काम तस्मात् तद् ब्रह्म शाश्वतम्,जीव अपनी इच्छाके अनुसार उस शरीरमें प्रवेश करके सूक्ष्म और अव्यक्त होनेके कारण कहीं आसक्त नहीं होता है; क्योंकि वास्तवमें वह सनातन परब्रह्म-स्वरूप है
جیو اپنی خواہش کے مطابق اس جسم میں داخل ہوتا ہے؛ مگر لطیف اور غیر ظاہر ہونے کے سبب کہیں بھی وابستہ نہیں ہوتا، کیونکہ حقیقت میں وہ ازلی و ابدی پرَبْرہْم کا ہی روپ ہے۔
ब्राह्मण उवाच