Vyāsa’s Boon-Offer and Dhṛtarāṣṭra’s Remorse in the Forest Assembly (आश्रमवासिक पर्व, अध्याय ३६)
दावाग्निना समायुक्ते स च राजा पिता तव । संजयस्तु महामात्रस्तस्माद् दावादमुच्यत,इसके बाद महाभागा गान्धारी, तुम्हारी माता कुन्ती तथा तुम्हारे ताऊ राजा धृतराष्ट्र-- ये तीनों ही दावाग्निमें जलकर भस्म हो गये; परंतु महामात्य संजय उस दावाग्निसे जीवित बच गये हैं
دَواگنی میں گھرے ہوئے تمہارے پدرانہ بزرگ وہ بادشاہ (دھرتراشٹر) بھی راکھ ہو گئے؛ مگر مہامنتری سنجے اُس آتشِ جنگل سے بچ نکلے اور رہائی پائی۔
नारद उवाच