वर्धमानतिलं श्राद्धमक्षयं मनुरब्रवीत् | सर्वेष्वेव तु भोज्येषु तिला: प्राधान्यत: स्मृता:,मनुजीका कथन है कि जिस श्राद्धमें तिलकी मात्रा अधिक रहती है, वह श्राद्ध अक्षय होता है। श्राद्ध-सम्बन्धी सम्पूर्ण भोज्य-पदार्थोंमें तिलोंका प्रधानरूपसे उपयोग बताया गया है
منو کا قول ہے کہ جس شرادھّ میں تل کی مقدار زیادہ ہو وہ شرادھّ اَکشَی (لازوال) پھل دینے والا ہوتا ہے۔ شرادھّ سے متعلق تمام خوردنی اشیا میں تل کو بنیادی حیثیت حاصل ہے۔
भीष्म उवाच