Suvarṇa-dāna: Kārttikeya’s Origin and the Defeat of Tāraka (सुवर्णदान-प्रसङ्गे कार्त्तिकेय-उत्पत्ति तथा तारकवधः)
ततो यज्ञा: प्रवर्तन्ते हव्यं कव्यं च सर्वश:,“उन्हींसे यज्ञ सम्पन्न होते और हव्य-कव्यका भी सर्वथा निर्वाह होता है। सुरेश्वर! इन्हीं गौओंसे दूध, दही और घी प्राप्त होते हैं। ये गौएँ बड़ी पवित्र होती हैं। बैल भूख-प्याससे पीड़ित होकर भी नाना प्रकारके बोझ ढोते रहते हैं
پھر انہی کے سبب یَجْن جاری ہوتے ہیں، اور ہَویہ اور کَویہ—دونوں کا ہر طرح سے اہتمام پورا ہوتا ہے۔
भीष्म उवाच