दानफलप्रकरणम् — उपानहदानं, तिलदानं, भूमिदानं, गोदानं, अन्नदानं च
Gifts and Their Stated Results: Footwear, Sesame, Land, Cows, and Food
भीष्मजीने कहा--बेटा! सब दानोंसे बढ़कर पृथ्वीदान बताया गया है। पृथ्वी अचल और अक्षय है। वह इस लोकमें समस्त उत्तम भोगोंको देनेवाली है ।। दोग्ध्री वासांसि रत्नानि पशून् व्रीहियवांस्तथा । भूमिद: सर्वभूतेषु शाश्वतीरेधते समा:,वस्त्र, रत्न, पशु और धान-जौ आदि नाना प्रकारके अन्न--इन सबको देनेवाली पृथ्वी ही है; अतः पृथ्वीका दान करनेवाला मनुष्य सदा समस्त प्राणियोंमें सबसे अधिक अभ्युदयशील होता है
bhīṣma uvāca—dogdhrī vāsāṃsi ratnāni paśūn vrīhi-yavāṃs tathā | bhūmidaḥ sarvabhūteṣu śāśvatīr edhate samāḥ ||
زمین دودھ دینے والی گائے کی مانند لباس، جواہرات، مویشی اور دھان و جو وغیرہ اناج عطا کرتی ہے؛ اس لیے زمین کا دان کرنے والا انسان تمام جانداروں میں ہمیشہ پائدار خوشحالی سے بڑھتا ہے۔
भीष्म उवाच