च्यवन-कुशिक-संवादः
Cyavana–Kuśika Dialogue on Hospitality, Service, and Lineage Questions
अन्यत्र क्षेत्रज: पुत्रो लक्ष्यते भरतर्षभ । न हाात्मा शक््यते हन्तुं दृष्टान्तोपगतो हासौ,भरतश्रेष्ठ! दूसरेके क्षेत्रमें उत्पन्न हुआ पुत्र विभिन्न लक्षणोंसे लक्षित हो जाता है कि किसका पुत्र है। कोई भी अपनी असलियतको छिपा नहीं सकता, वह स्वतः प्रत्यक्ष हो जाती है
اے بھرت شریشٹھ! دوسرے کے کھیت (رحم) میں پیدا ہونے والا بیٹا مختلف علامتوں سے پہچانا جاتا ہے کہ وہ کس کا بیٹا ہے۔ کوئی اپنی اصل حقیقت چھپا نہیں سکتا؛ وہ خود بخود ظاہر ہو جاتی ہے۔
भीष्म उवाच