च्यवन-कुशिक-संवादः
Cyavana–Kuśika Dialogue on Hospitality, Service, and Lineage Questions
मागधो वामकइश्नैव द्वौ वैश्यस्योपलक्षितौ । ब्राह्माण्यां क्षत्रियायां च क्षत्रियस्यैक एव तु,ब्राह्मणी और क्षत्रियाके गर्भसे वैश्यद्वारा जो पुत्र उत्पन्न किये जाते हैं, वे क्रमश: मागध और वामक नामवाले दो प्रकारके अपसद देखे गये हैं। क्षत्रियके एक ही वैसा पुत्र देखा जाता है, जो ब्राह्मणीसे उत्पन्न होता है। उसकी सूत संज्ञा है। ये छ: अपसद अर्थात् प्रतिलोम पुत्र माने गये हैं। नरेश्वर! इन पुत्रोंको मिथ्या नहीं बताया जा सकता
bhīṣma uvāca |
māgadho vāmakaiś caiva dvau vaiśyasyopalakṣitau |
brāhmaṇyāṁ kṣatriyāyāṁ ca kṣatriyasyaika eva tu ||
بھیشم نے کہا—برہمنی اور کشتریہ عورت کے رحم میں ویشیہ سے جو بیٹے پیدا ہوں، وہ بالترتیب ‘ماغدھ’ اور ‘وامک’ نام کے دو قسم کے اپسد مانے گئے ہیں۔ مگر کشتریہ کے لیے ایسا صرف ایک ہی بیٹا تسلیم کیا گیا ہے—جو برہمنی سے پیدا ہو؛ وہ ‘سوت’ کہلاتا ہے۔
भीष्म उवाच