कालयुक्तधर्मविवेकः
Discerning Dharma in Accord with Time
नाधर्मेण न धर्मेण बध्यन्ते छिन्नसंशया: । प्रलयोत्पत्तितत्त्वज्ञा: सर्वज्ञा: सर्वदर्शिन:,जिनके सब प्रकारके संदेह दूर हो गये हैं, जो प्रलय और उत्पत्तिके तत्त्वको जाननेवाले, सर्वज्ञ और सर्वद्रष्टा हैं, वे महात्मा न तो धर्मसे बँधते हैं और न अधर्मसे
جن کے ہر طرح کے شکوک کٹ چکے ہیں، جو فنا (پرلَے) اور پیدائش کے اصولوں کو جاننے والے، ہمہ دان اور ہمہ بین ہیں—وہ مہاتما نہ ادھرم سے بندھتے ہیں نہ دھرم سے۔
श्रीमहेश्वर उवाच