Brāhmaṇa-pūjā and Namaskāra: Criteria of Reverence and Non-Offense (ब्राह्मणपूजा-नमस्कारविधिः)
येषामेतानि तिष्ठन्ति गृहेषु गृहमेधिनाम् । तान्यधृष्याण्यगाराणि पिशिताशै: सुदारुणै:,जिसके घरमें अग्निहोत्रकी अग्नि नित्य--दिन-रात देदीप्यमान रहती है, छोटे जातिके बाघ (जरख) का चर्म, उसीकी दाढ़ें तथा पहाड़ी कछुआ मौजूद रहता है, घीकी आहुतिसे सुगन्धित धूम निकलता रहता है, बिलाव तथा काला या पीला बकरा रहता है, जिन गृहस्थोंके घरोंमें ये सभी वस्तुएँ स्थित होती हैं, उन घरोंपर भयंकर मांसभक्षी निशाचर आक्रमण नहीं करते हैं
bhīṣma uvāca | yeṣām etāni tiṣṭhanti gṛheṣu gṛhamedhinām | tāny adhṛṣyāṇy agārāṇi piśitāśaiḥ sudāruṇaiḥ ||
بھیشم نے کہا— جن گِرہستھوں کے گھروں میں یہ مقررہ چیزیں قاعدے کے مطابق رکھی اور نبھائی جاتی ہیں، وہ گھر ناقابلِ تسخیر ہو جاتے ہیں؛ نہایت ہولناک گوشت خور نِشَچَر بھی ان پر حملہ نہیں کر سکتے۔
भीष्म उवाच