Daśa-Karmapatha: Restraints of Body, Speech, and Mind (दश कर्मपथ)
असप्प्रलापं पारुष्यं पैशुन्यमनृतं तथा । चत्वारि वाचा राजेन्द्र न जल्पेन्नानुचिन्तयेत्,मुँहसे बुरी बातें निकालना, कठोर बोलना, चुगली खाना और झूठ बोलना--ये चार वाणीसे होनेवाले पाप हैं। राजेन्द्र! इन्हें न तो कभी जबानपर लाना चाहिये और न मनमें ही सोचना चाहिये
فضول و ناپاک گفتگو، سخت کلامی، چغلی اور جھوٹ—یہ چار گناہ زبان سے ہوتے ہیں۔ اے راجندر! نہ انہیں زبان پر لانا چاہیے اور نہ دل میں بھی سوچنا چاہیے۔
भीष्म उवाच