अन्नदानफलं (Anna-dāna-phala) / The Fruit of Food-Giving
(दाक्षिणात्य अधिक पावका ई “लोक मिलाकर कुल २१३ “लोक हैं) भीस्न्आ+ज (2) आसन मना नवाधिकशततमो<्ध्याय: प्रत्येक मासकी द्वादशशी तिथिको उपवास और भगवान् विष्णुकी पूजा करनेका विशेष माहात्म्य युधिछिर उवाच सर्वेषामुपवासानां यच्छेय: सुमहत्फलम् । यच्चाप्यसंशयं लोके तनमे त्वं वक्तुमहसि,युधिष्ठिरने कहा--पितामह! समस्त उपवासोंमें जो सबसे श्रेष्ठ और महान् फल देनेवाला है तथा जिसके विषयमें लोगोंको कोई संशय नहीं है, वह आप मुझे बताइये
Yudhiṣṭhira uvāca: Sarveṣām upavāsānāṁ yac chreyaḥ sumahat phalam | yac cāpy asaṁśayaṁ loke tan me tvaṁ vaktum arhasi ||
یُدھِشٹھِر نے کہا— اے پِتامہ! تمام روزوں میں کون سا سب سے افضل اور عظیم ترین پھل دینے والا ہے، اور جس کے بارے میں دنیا میں کوئی شک نہیں—وہ مجھے بتائیے۔
युधिछिर उवाच