ययातेर्वानप्रस्थतपःस्वर्गारोहणम् | Yayāti’s Vānaprastha Austerities and Ascent to Heaven
ययातिरुवाच एकदवेहोद्धवा वर्णश्षृत्वारोडपि वराड़ने । पृथग्धर्मा: पृथक्छौचास्तेषां तु ब्राह्मणो वर:,ययाति बोले--वरांगने! एक ही परमेश्वरके शरीरसे चारों वर्णोंकी उत्पत्ति हुई है; परंतु सबके धर्म और शौचाचार अलग-अलग हैं। ब्राह्मण उन सब वर्णोमें श्रेष्ठ हैं
یایاتی نے کہا—اے نازنین! ایک ہی پرمیشور کے جسم سے چاروں ورن پیدا ہوئے ہیں؛ مگر ان کے دھرم اور طہارت کے آداب جدا جدا ہیں۔ ان سب میں برہمن برتر مانا گیا ہے۔
वैशम्पायन उवाच