Kuru-Sainika-Āśvāsana and Vijayaghoṣaṇa
Reassuring the Kuru Soldiers; Proclaiming Victory
/ अप८ा अपर () ऑज अपार द्विषष्टितमो<5 ध्याय: अर्जुनका सब योद्धाओं और महारथियोंके साथ युद्ध वैशम्पायन उवाच अथ संगम्य सर्वे ते कौरवाणां महारथा: । अर्जुनं सहिता यत्ता: प्रत्ययुध्यन्त भारत,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! तदनन्तर कौरवसेनाके सब महारथी मिलकर एक साथ संगठित हो बड़ी सावधानीके साथ अर्जुनका सामना करने लगे इस प्रकार श्रीमह्ााभारत विराटपर्वके अन्तर्गत गोहरणपर्वमें अर्जुनके संकुलयुद्धसोे सम्बन्ध रखनेवाला बासठवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ ६२ ॥। हि >> आय न () है आस त्रेषष्टितमो<्ध्याय: अर्जुनपर समस्त कौरवपक्षीय महारथियोंका आक्रमण और सबका युद्धभूमिसे पीठ दिखाकर भागना वैशम्पायन उवाच ततो दुर्योधन: कर्णो दुःशासनविविंशती । द्रोणश्न सह पुत्रेण कृपश्चापि महारथ:
Vaiśampāyana uvāca | atha saṅgamya sarve te kauravāṇāṃ mahārathāḥ | arjunaṃ sahitā yattāḥ pratyayudhyanta bhārata ||
Sinabi ni Vaiśampāyana: Pagkaraan, nagtipon ang lahat ng dakilang mandirigmang-karwahe ng mga Kaurava; sama-samang umusad sa maayos na hanay, buong pag-iingat, at nakipaglaban kay Arjuna sa sagupaan, O Bhārata.
वैशम्पायन उवाच