कुन्ती द्वारा ब्राह्मण-सेवा
Kuntī’s Regulated Hospitality to a Brāhmaṇa Guest
अवमन्येह न: सर्वान् करोति कदनं महत् । मया त्वपह्ता भार्या सीता नामास्य जानकी,“हमलोगोंपर जो यह अत्यन्त दारुण एवं महान् भय उपस्थित हुआ है, इसका तुम्हें पता ही नहीं है। यह राम सेतुद्वारा समुद्रको लाँधघकर हमलोगोंकी अवहेलना करके वानरोंके साथ यहाँ आ पहुँचा है और राक्षसोंका महासंहार कर रहा है। मैंने इसकी पत्नी जनककुमारी सीताका अपहरण किया था
avamanyeha naḥ sarvān karoti kadanaṃ mahat | mayā tv apahṛtā bhāryā sītā nāmāsya jānakī ||
Sinabi ni Mārkaṇḍeya: “Hinahamak niya tayong lahat dito at nagdudulot ng napakalaking pagwasak. Tunay nga, ako ang dumukot sa kanyang asawa—si Jānakī na ang pangalan ay Sītā.”
मार्कण्डेय उवाच