अर्जुनस्योत्तरदिग्विजयः
Arjuna’s Northern Conquests and Tribute Collection
हि ही बक। हि मा मी - दोनों हाथोंसे शत्रुका कंधा पकड़कर खींचने और उसे नीचे मुख गिरानेकी चेष्टाका नाम “निग्रह” है तथा शत्रुको उत्तान गिरा देनेके लिये उसके पैरोंको पकड़कर खींचना “प्रग्रह” कहलाता है। चतुर्विशो$ध्याय: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी हाल श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना वैशम्पायन उवाच भीमसेनस्तत: कृष्णमुवाच यदुनन्दनम् । बुद्धिमास्थाय विपुलां जरासंधवधेप्सया,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! तदनन्तर भीमसेनने विशाल बुद्धिका सहारा ले जरासंधके वधकी इच्छासे यदुनन्दन श्रीकृष्णको सम्बोधित करके कहा--
vaiśampāyana uvāca | bhīmasenas tataḥ kṛṣṇam uvāca yadunandanam | buddhim āsthāya vipulāṃ jarāsandha-vadhepsayā ||
Sinabi ni Vaiśampāyana: Pagkaraan nito, si Bhīmasena—nagnanais pumatay kay Jarāsandha at umaasa sa malawak at matatag na talino—ay nagsalita kay Kṛṣṇa, ang ligaya ng angkan ng Yadu.
वैशम्पायन उवाच