पाण्डवानां पाञ्चालगमनम्
The Pāṇḍavas’ Journey toward Pāñcāla and News of the Svayaṃvara
यथेच्छसि तथा क्षिप्रं कुरु मा त्वं विचारय । वसिष्ठजीने कहा--तुम सेनाके साथ हो, राजा हो और अपने बाहुबलका भरोसा रखनेवाले क्षत्रिय हो। जैसी तुम्हारी इच्छा हो वैसा शीघ्र कर डालो, विचार न करो ।। २०६ || गन्धर्व उवाच एवमुक्तस्तथा पार्थ विश्वामित्रो बलादिव,गन्धर्व कहता है--अर्जुन! वसिष्ठजीके यों कहनेपर विश्वामित्रने मानो बलपूर्वक ही हंस और चन्द्रमाके समान श्वेत रंगवाली उस नन्दिनी गायका अपहरण कर लिया। उसे कोड़ों और डंडोंसे मार-मारकर इधर-उधर हाँका जा रहा था
gandharva uvāca | yathecchasi tathā kṣipraṃ kuru mā tvaṃ vicāraya |
Wika ng Gandharva: “Gawin mo ang ayon sa nais mo, at gawin mo agad. Huwag mag-atubili o magmuni-muni pa.”
गन्धर्व उवाच