उत्तरो जयमावेदयति—विराटस्य हर्षः, द्यूतनिषेधः
Uttara’s Victory Report—Virāṭa’s Rejoicing and the Counsel Against Gambling
तथा तैरवकीर्णस्य दिव्यैरस्त्रै: समन््तत: । न तस्य द्वयड्गुलमपि विवृतं सम्प्रदृश्यते,वे महारथी जब इस प्रकार सब ओरसे अर्जुनपर दिव्यास्त्रोंसे अभिमन्त्रित बाणोंकी वर्षा करने लगे, उस समय उनके शरीरका दो अंगुल भाग भी बाणोंसे खाली नहीं दिखायी देता था
ไวศัมปายนะกล่าวว่า—เมื่อมหารถีเหล่านั้นระดมศรด้วยศัสตราทิพย์จากทุกทิศจนเขาถูกปกคลุม ก็ไม่ปรากฏแม้เพียงช่องว่างกว้างสองนิ้วบนกายของอรชุนที่ปราศจากศร
वैशम्पायन उवाच