कृपकर्णसंवादः
Kṛpa’s Counsel to Karṇa on Deśa-Kāla and Coordinated Strategy
अभिप्रयामि संग्रामे यदहं युद्धदुर्मदान् । नाजित्वा विनिवर्तामि तेन मां विजयं विदु:,जब मैं संग्रामभूमिमें रणोन्मत्त योद्धाओंका सामना करनेके लिये जाता हूँ, तब उन्हें परास्त किये बिना कभी नहीं लौटता। इसीलिये वीर पुरुष मुझे “विजय” के नामसे जानते हैं
เมื่อข้าพเจ้าออกสู่สมรภูมิเพื่อเผชิญหน้านักรบผู้ดุเดือดเมามันด้วยศึก ข้าพเจ้าไม่เคยหวนกลับโดยมิได้พิชิตเขา ด้วยเหตุนี้เหล่าวีรชนจึงรู้จักข้าพเจ้าด้วยนามว่า ‘วิชัย’
अर्जुन उवाच