Virāṭa-parva Adhyāya 21 — Kīcaka’s clandestine approach and Bhīma’s covert intervention (नर्तनागारे कीचकवध-प्रसङ्गः)
सभायां तु विराटस्य करोमि कदनं महत् | तत्र मे कारणं भाति कौन्तेयो यत् प्रतीक्षते,मैं तो उसी दिन विराटकी सभामें ही भारी संहार मचा देता, किंतु ऐसा न करनेमें कारण बन गये कुन्तीनन्दन महाराज युधिष्ठिर। वे प्रकट हो जानेका भय सूचित करते हुए मेरी ओर देखने लगे
แท้จริงแล้วในวันนั้นเราคงก่อการสังหารใหญ่ในท้องพระโรงของวิราฏเสียแล้ว; แต่เหตุที่เรายับยั้งก็เพราะกุนตีบุตร ยุธิษฐิระ มองมาที่เราราวกับส่งสัญญาณให้รอคอย
भीमसेन उवाच