कृतार्थ चावगच्छामि परमात्मानमाहवे । शत्रृंश्न विजितान् सर्वान् निर्वृत्तं च प्रयोजनम्,आज मैं अपने-आपको परम कृतार्थ मानता हूँ, साथ ही यह विश्वास करता हूँ कि महासमरमें अपने समस्त शत्रुओंपर विजय प्राप्त करूँगा। अब मेरा अभीष्ट प्रयोजन सिद्ध हो गया
วันนี้เราถือว่าตนได้บรรลุผลอย่างยิ่ง และย่อมรู้แน่ว่าในมหาสงครามเราจะมีชัยเหนือศัตรูทั้งปวง บัดนี้กิจที่มุ่งหมายก็สำเร็จแล้ว
वैशम्पायन उवाच