Śiva Grants the Pāśupata Astra (Pāśupata-Śastra Upadeśa) | शिवेन पाशुपतास्त्रदानम्
प्रीतो5हमपि ते प्राज्ञ पाण्डवेय महाबल । त्वया सह समागम्य अजितेन तथैव च,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! वरुण और यमके दिव्यास्त्र प्रदान कर चुकनेपर कैलासनिवासी धनाध्यक्ष कुबेरने कहा--“महाबली बुद्धिमान् पाण्डुनन्दन! मैं भी तुमपर प्रसन्न हूँ। तुम अपराजित वीर हो। तुमसे मिलकर मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई है”
vaiśampāyana uvāca | prīto 'ham api te prājña pāṇḍaveya mahābala | tvayā saha samāgamya ajitena tathaiva ca ||
โอ้บุตรแห่งปาณฑุ ผู้ปราชญ์และมหากำลัง เราก็ยินดีในตัวเจ้าเช่นกัน ได้พบเจ้า—ผู้มิอาจพิชิต—เราก็ปลาบปลื้มยิ่งนัก
वैशम्पायन उवाच