पञ्चवर्णोत्पत्तिः — The Origin of the Five-Colored Fiery Being and Ritual-Disruptor Lineages
शुभै: प्रयोगैर्देवत्वं व्यामिश्रैर्मानुषो भवेत् मोहनीयैर्वियोनीषु त्वधोगामी च किल्बिषी,शुभकर्मोंके संयोगसे जीवको देवत्वकी प्राप्ति होती है। शुभ और अशुभ दोनोंके सम्मिश्रणसे उसका मनुष्य-योनिमें जन्म होता है। मोहमें डालनेवाले तामस कर्मोंके आचरणसे जीव पशु, पक्षी आदिकी योनिमें जन्म ग्रहण करता है और जिसने केवल पापका ही संचय किया है, वह नरकगामी होता है
śubhaiḥ prayogair devatvaṃ vyāmiśrair mānuṣo bhavet | mohanīyair viyonīṣu tv adhogāmī ca kilbiṣī ||
ด้วยการประกอบกุศลกรรมอย่างสม่ำเสมอ ย่อมบรรลุภาวะแห่งเทวะ; ด้วยกรรมที่ปนทั้งดีและชั่ว ย่อมได้เกิดเป็นมนุษย์. ด้วยกรรมตมัสอันชวนให้หลงและบดบังปัญญา ย่อมตกสู่ครรภ์ต่ำ เช่นสัตว์เดรัจฉานและนก. ส่วนผู้สั่งสมแต่บาปเท่านั้น ย่อมเป็นผู้ตกต่ำ มุ่งสู่นรกภูมิ
व्याध उवाच