अध्याय ८७: कृष्णस्य हस्तिनापुरप्रवेशः
Krishna’s Entry into Hastināpura and Court Reception
भीष्म उवाच परीतस्तव पुत्रो5यं धृतराष्ट्र सुमन्दधी: । वृणोत्यनर्थ नैवार्थ याच्यमान: सुहज्जनै:,यह सुनकर भीष्मजीने कहा--धृतराष्ट्र! तुम्हारा यह मन्दबुद्धि पुत्र कालके वशमें हो गया है। यह अपने हितैषी सुहृदोंके कहने-समझानेपर भी अनर्थको ही अपना रहा है; अर्थको नहीं
ภีษมะกล่าวว่า “ธฤตราษฏระ! บุตรของท่านผู้นี้มีปัญญาทึบยิ่งนัก และตกอยู่ใต้อำนาจแห่งกาล แม้เหล่าสุหฤทผู้หวังดีจะวิงวอนตักเตือน เขาก็มิเลือกประโยชน์ หากเลือกอนर्थภัยเท่านั้น”
भीष्म उवाच