भीमसेनस्य आत्मबलप्रशंसा — Bhīmasena’s Assertion of Strength
Udyoga Parva, Adhyāya 74
एकान्ते निः:श्वसज्छेषे भारार्त इव दुर्बल: । अपि त्वां केचिदुन्मत्तं मन्यन्तेडतद्विदों जना:,भारी बोझसे पीड़ित दुर्बल मनुष्यकी भाँति तुम एकान्तमें बैठकर जोर-जोरसे साँस खींचते रहते थे। इसीलिये तुम्हें कुछ लोग, जो इस बातको नहीं जानते हैं, पागल मानते हैं
ในที่ลับสงัด ท่านถอนใจยาวครั้งแล้วครั้งเล่า ประหนึ่งคนอ่อนแรงที่ถูกภาระหนักกดทับ; เพราะเหตุนี้ คนบางพวกที่ไม่รู้ความจริงจึงสำคัญว่าท่านวิกลจริต
वैशम्पायन उवाच