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Shloka 21

भीमसेनस्य आत्मबलप्रशंसा — Bhīmasena’s Assertion of Strength

Udyoga Parva, Adhyāya 74

इदं मे महदाश्चर्य पर्वतस्येव सर्पणम्‌ । यदीदृशं प्रभाषेथा भीमसेनासमं वच:,भीमसेन! तुम जो बात कह रहे हो, वह तुम्हारे योग्य कदापि नहीं है। जैसे पर्वतका चलना आश्चर्यकी बात है, उसी प्रकार तुम्हारे द्वारा किया हुआ यह शान्ति-प्रस्ताव मुझे महान आश्चर्यमें डाल रहा है

ไวศัมปายนะกล่าวว่า—“นี่เป็นความอัศจรรย์ยิ่งสำหรับเรา ประหนึ่งภูเขาเคลื่อนที่ได้ ภีมเสนะเอ๋ย วาจาเช่นนี้ไม่สมควรออกจากปากเจ้าเลย ข้อเสนอเรื่อง ‘สันติ’ นี้ทำให้เราตกตะลึงนัก”

वैशम्पायन उवाच