Udyoga-parva Adhyāya 71 — Kṣatra-dharma Counsel, Public Legitimacy, and Mobilization
सर्वथा वृजिन युद्ध को घ्नन् न प्रतिहन्यते । हतस्य च हृषीकेश समौ जयपराजयौ,इससे सिद्ध होता है कि युद्ध सर्वथा पापरूप ही है। दूसरोंको मारनेवाला कौन ऐसा पुरुष है, जो बदलेमें स्वयं भी मारा न जाता हो? हृषीकेश! जो युद्धमें मारा गया, उसके लिये तो विजय और पराजय दोनों समान हैं
ดังนี้ย่อมประจักษ์ว่าสงครามเป็นบาปโดยสิ้นเชิง ผู้ที่ฆ่าผู้อื่นมีหรือจะไม่ถูกฆ่าตอบในที่สุด? โอ้ หฤษีเกศะ สำหรับผู้ที่ล้มตายในสนามรบ ชัยชนะและความพ่ายแพ้ย่อมเสมอกัน
युधिछिर उवाच