उद्योगपर्व — अध्याय ५४: दुर्योधनस्य धृतराष्ट्रं प्रति बलप्रशंसन-युक्तः आश्वासनवादः
Duryodhana’s Reassurance and Force-Praise to Dhritarashtra
एकैक एपषां शक्तस्तु हन्तुं भारत पाण्डवान् । समेतास्तु क्षणेनैतान् नेष्यन्ति यमसादनम् । भारत! भीष्म, द्रोण, कृप, अश्वत्थामा, कर्ण, भूरिश्रवा, प्राग्ज्योतिषनरेश भगदत्त, मद्रराज शल्य तथा सिन्धुराज जयद्रथ--इनमेंसे एक-एक वीर समस्त पाण्डवोंको मारनेकी शक्ति रखता है। यदि ये सब एक साथ मिल जाय॑ँ तो क्षणभरमें उन सबको यमलोक पहुँचा देंगे
ekaika eṣāṁ śaktas tu hantuṁ bhārata pāṇḍavān | sametās tu kṣaṇenaitān neṣyanti yamasādanam ||
ทุรโยธนะกล่าวว่า “โอ ภารตะ นักรบเหล่านี้แต่ละคนล้วนสามารถสังหารปาณฑพได้ด้วยตนเอง; แต่หากรวมกำลังพร้อมกัน ก็จะส่งพวกเขาไปสู่สำนักพระยมได้ในชั่วขณะเดียว”
दुर्योधन उवाच