Vidura-nīti: Atithi-dharma, Trust, Counsel-Secrecy, and Traits of Sustainable Rule
Udyoga Parva, Adhyāya 38
जो अधर्मके द्वारा कमाये हुए धनसे पारलौकिक कर्म करता है, वह मरनेके पश्चात् उसके फलको नहीं पाता; क्योंकि उसका धन बुरे रास्तेसे आया होता है ।। कान्तारे वनदुर्गेषु कृच्छास्वापत्सु सम्भ्रमे । उद्यतेषु च शस्त्रेषु नास्ति सत्त्ववतां भयम्,घोर जंगलमें, दुर्गम मार्गमें, कठिन आपत्तिके समय, घबराहटमें और प्रहारके लिये शस्त्र उठे रहनेपर भी सत्त्व-सम्पन्न अर्थात् आत्मबलसे युक्त पुरुषोंको भय नहीं होता
kāntāre vanadurgeṣu kṛcchrāsv āpatsu sambhrame | udyateṣu ca śastreṣu nāsti sattvavatāṃ bhayam ||
วิทุระสอนว่า—ในพงไพรอันน่าหวาดหวั่น ในทางป่าที่ทุรกันดาร ในคราววิบัติอันหนัก ในความตระหนกฉับพลัน และแม้เมื่ออาวุธถูกชูขึ้นเพื่อฟันฟาด ผู้มีสตฺตวะ (ผู้มั่นคงด้วยกำลังใจ) ย่อมไม่มีความกลัว
विदुर उवाच