Drupada’s Alarm and Inquiry Regarding Śikhaṇḍinī (द्रुपदस्य भय-विमर्शः)
प्रेषयामास सत्कृत्य दूत॑ ब्रह्म॒विदां वरम् । काम्पिल्य नगरके निकट पहुँचकर दशार्णराजने वेद-वेत्ताओंमें श्रेष्ठ एक ब्राह्मणको सत्कारपूर्वक दूत बनाकर भेजा || १४ इ || ब्रूहि मद्गबचनाद् दूत पाञ्चाल्यं तं नृपाधमम्,और कहा--'दूत! मेरे कथनानुसार राजाओंमें अधम उस पांचालनरेशसे कहिये। दुर्मते! तुमने जो अपनी कन्याके लिये मेरी कनन््याका वरण किया था, उस घमंडका फल तुम्हें आज देखना पड़ेगा, इसमें संशय नहीं है”
preṣayāmāsa satkṛtya dūtaṁ brahmavidāṁ varam | brūhi madvacanād dūta pāñcālyaṁ taṁ nṛpādhamam ||
พระองค์ทรงให้เกียรติพราหมณ์ผู้เลิศในหมู่นักรู้พระเวท แล้วส่งไปเป็นทูต พร้อมรับสั่งว่า “ทูตเอ๋ย จงกล่าวตามวาจาของเราแก่กษัตริย์ปัญจาลผู้นั้น ผู้ต่ำช้าในหมู่ราชา”
भीष्म उवाच