Nahūṣa’s Pride, the Ṛṣi-Borne Palanquin, and the Search for Indra (नहुष-इन्द्राणी-प्रकरणम्)
न च व्रीडा त्वया कार्या सुश्रोणि मयि विश्वसे: । सत्येन वै शपे देवि करिष्ये वचनं तव,'सुश्रोणि! तुम्हें मुझसे लज्जा नहीं करनी चाहिये। मुझपर विश्वास करो। देवि! मैं सत्यकी शपथ खाकर कहता हूँ, तुम्हारी प्रत्येक आज्ञाका पालन करूँगा”
na ca vrīḍā tvayā kāryā suśroṇi mayi viśvase | satyena vai śape devi kariṣye vacanaṃ tava ||
“โอ้ผู้มีสะโพกงาม อย่าได้อายต่อเราเลย จงไว้วางใจเราเถิด โอ้ผู้ประดุจเทวี เราขอสาบานต่อสัจจะว่า เราจักทำตามถ้อยคำของเจ้า”
शल्य उवाच