उद्योगपर्व — अध्याय १३५: कुन्त्याः कृष्णं प्रति संदेशः
Kuntī’s Message to Kṛṣṇa
य एवात्यन्तसुहृदस्त एन॑ पर्युपासते । अशक्तय: स्वस्तिकामा बद्धवत्सा इडा इव,जो लोग अत्यन्त सुहृद होते हैं, वे ही उस संकटके समय उस राजाके पास रह जाते हैं; परंतु वे भी असमर्थ होनेके कारण बाँधे हुए बछड़ेवाली गायोंकी भाँति कुछ कर नहीं पाते, केवल मन-ही-मन उसकी मंगलकामना करते रहते हैं
ya evātyantasuḥṛdas ta enaṁ paryupāsate | aśaktāḥ svastikāmā baddhavatsā iḍā iva ||
ยามวิกฤตนั้น มีเพียงผู้ที่เป็นมิตรแท้ผู้ใกล้ชิดยิ่งเท่านั้นที่ยังคงอยู่เคียงพระราชา แต่เพราะไร้กำลัง เขาก็ทำสิ่งใดมิได้—ดุจโคที่ลูกถูกผูกไว้ ทำได้เพียงอธิษฐานขอความสวัสดีมงคลแก่พระองค์อยู่ในใจ
पुत्र उवाच