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Shloka 8

Vidurā–Putra Saṃvāda: Utsāha, Kīrti, and Kṣātra Resolve

Udyoga-parva 131

क्रूराय कर्मणे नित्यं प्रजानां परिपालने । शृणु चात्रोपमामेकां या वृद्धेभ्य: श्रुता मया,वे युद्धरूपी कठोर कर्मके लिये रचे गये हैं तथा सदा प्रजापालनरूपी धर्ममें प्रवृत्त होते हैं। मैं इस विषयमें एक उदाहरण देती हूँ, जिसे मैंने बड़े-बूढ़ोंके मुँहले सुन रखा है

พวกท่านถูกสร้างมาเพื่อกิจอันแข็งกร้าวคือสงคราม และย่อมตั้งมั่นอยู่เสมอในธรรมแห่งการอภิบาลประชา บัดนี้จงฟังอุปมาหนึ่งในเรื่องนี้ ซึ่งข้าได้ยินมาจากผู้เฒ่าผู้แก่

वायुदेव उवाच