Adharmic Victory as Unstable; Rules of Restraint, Mediation, and Conciliation (अधर्मविजय-अध्रुवत्व तथा क्षमा-नयः)
अपन बछ। है २ >> षण्णवतितमो< ध्याय: राजाके छलरहित धर्मयुक्त बर्तावकी प्रशंसा भीष्म उवाच नाधर्मेण महीं जेतुं लिप्सेत जगतीपति: । अधर्मविजयं लब्ध्वा को नु मन्येत भूमिप:,भीष्मजी कहते हैं--युधिष्ठि![ किसी भी भूपालको अधर्मके द्वारा पृथ्वीपर विजय प्राप्त करनेकी इच्छा कभी नहीं करनी चाहिये। अधर्मसे विजय पाकर कौन राजा सम्मानित हो सकता है?
bhīṣma uvāca | nādharmeṇa mahīṃ jetuṃ lipseta jagatīpatiḥ | adharmavijayaṃ labdhvā ko nu manyeta bhūmipaḥ ||
ภีษมะกล่าวว่า—โอ้ยุธิษฐิระ! ผู้เป็นกษัตริย์ผู้รับภาระแห่งโลก ไม่พึงปรารถนาจะพิชิตแผ่นดินด้วยอธรรมเลย เพราะเมื่อได้ชัยด้วยอธรรมแล้ว กษัตริย์ผู้ใดเล่าจะนับว่าเป็นผู้ทรงเกียรติ?
भीष्म उवाच