Mantri-Parīkṣā — Testing Ministers, Securing Counsel, and Ethical Criteria for Advisers (अध्याय ८४)
यः स्वल्पेनापि कार्येण सुहृदाक्षारितो भवेत् । पुनरन्यैर्गुणैर्युक्तो न मन्त्र श्रेतुमहीति,जो थोड़े-से भी अनुचित कार्यके कारण दण्डित करके निर्धन कर दिया गया हो, वह सुहृद् एवं अन्यान्य गुणोंसे सम्पन्न होनेपर भी गुप्त मन्त्रणा सुननेके योग्य नहीं है
ผู้ใดแม้เพราะการกระทำอันไม่สมควรเพียงเล็กน้อยก็ถูกมิตรสหายลงโทษจนสิ้นเนื้อประดาตัว—ต่อให้ภายหลังมีคุณสมบัติอื่นและเป็นผู้หวังดี ก็ยังไม่สมควรได้ฟังคำปรึกษาลับ
भीष्म उवाच