Treasury Security, Protection of Informants, and the Kalakavṛkṣīya Exemplum (Śānti Parva 83)
यथा<5श्रित्य महावृक्ष॑ं कक्ष: संवर्धते महान् ततस्तं संवृणोत्येव तमतीत्य च वर्धते,जैसे कुत्तों, गीधों और गीदड़ोंसे घिरा हुआ राजहंस बैठा हो, उसी तरह दुष्ट कर्मचारियोंसे आप घिरे हुए हैं। जैसे लताओंका विशाल समूह किसी महान् वृक्षका आश्रय लेकर बढ़ता है, फिर धीरे-धीरे उस वृक्षको लपेट लेता है और उसका अतिक्रमण करके उससे भी ऊँचेतक फैल जाता है, फिर वही सूखकर भयानक ईंधन बन जाता है, तब दारुण दावानल उसी ईंधनके सहारे उस विशाल वृक्षको भी जला डालता है, राजन्! आपके मन्त्री भी उन्हीं सूखी लताओंके समान हो गये हैं अर्थात् आपके ही आश्रयसे बढ़कर आपहीके विनाशका कारण बन रहे हैं। अतः आप उनका शोधन कीजिये
bhīṣma uvāca | yathāśritya mahāvṛkṣaṃ kakṣaḥ saṃvardhate mahān | tataḥ taṃ saṃvṛṇoty eva tam atītya ca vardhate ||
ภีษมะกล่าวว่า “ดุจพุ่มเถาวัลย์ใหญ่ที่อาศัยต้นไม้มหึมาเติบโต แล้วค่อย ๆ ปกคลุมต้นนั้นและล้ำขึ้นไปสูงกว่า—ฉันใด ผู้พึ่งพาที่รุ่งเรืองด้วยการอุปถัมภ์ของกษัตริย์ก็ฉันนั้น ย่อมกลับมาทับถมกษัตริย์เอง ข้าแต่พระราชา มนตรีของท่านก็เป็นเช่นนั้นแล้ว จงตรวจสอบและชำระพวกเขาเสีย”
भीष्म उवाच