त्रैलोक्यस्यापि राज्येन नास्मान् वक्ित् प्रहर्षयेत् । बान्धवान् निहतान् दृष्टवा पृथिव्यां विजयैषिण:,जब हमने पृथ्वीपर विजयकी इच्छा रखनेवाले अपने बन्धु-बान्धवोंको मारा गया देख लिया, तब हमें इस समय तीनों लोकोंका राज्य देकर भी कोई प्रसन्न नहीं कर सकता
เมื่อเราได้เห็นญาติพี่น้องของตน ผู้ใฝ่ชัยชนะเหนือแผ่นดิน ถูกสังหารลงแล้ว บัดนี้แม้จะมอบราชย์แห่งไตรโลกย์ ก็ไม่มีผู้ใดทำให้เรายินดีได้
युधिछिर उवाच