Varṇa-dharma and Rājadharma: Yudhiṣṭhira’s Inquiry and Bhīṣma’s Normative Outline (वर्णधर्म-राजधर्म-प्रश्नोत्तरम्)
आसुरश्रैव विजयस्तथा कार्त्स्न्येन वर्णित: । लक्षणं पज्चवर्गस्य त्रिविध॑ चात्र वर्णितम्,शत्रुओंपर चढ़ाई करनेके चार- अवसर, त्रिवर्गके विस्तार, धर्म-विजय, अर्थ-विजय तथा आसुर-विजयका भी कक्त ग्रन्थमें पूर्णरूपसे वर्णन किया गया है। मन्त्री, राष्ट्र, दुर्ग, सेना और कोष--इन पाँच वर्गोंके उत्तम, मध्यम और अधम भेदसे तीन प्रकारके लक्षणोंका भी प्रतिपादन किया गया है
āsuraś caiva vijayas tathā kārtsnyena varṇitaḥ | lakṣaṇaṁ pañcavargasya trividhaṁ cātra varṇitam ||
ภีษมะกล่าวว่า—ที่นี่ได้พรรณนาชัยชนะอย่างอสูร (โหดร้ายและอธรรม) ไว้อย่างครบถ้วน และได้กล่าวถึงลักษณะขององค์ประกอบทั้งห้าของรัฐไว้เป็นสามระดับด้วย
भीष्म उवाच