Rājā–Rāja-Śabda-Prabhavaḥ — The Origin and Rationale of Kingship and Daṇḍanīti
तुल्यपाणिभुजग्रीवस्तुल्यबुद्धीन्द्रियात्मक: । तुल्यदुः:खसुखात्मा च तुल्यपृष्ठमुखोदर:,जिसे हम राजा कहते हैं, वह सभी गुणोंमें दूसरोंके समान ही है। उसके हाथ, बाँह और गर्दन भी औरोंकी ही भाँति हैं। बुद्धि और इन्द्रियाँ भी दूसरे लोगोंके ही तुल्य हैं। उसके मनमें भी दूसरे मनुष्योंके समान ही सुख-दुःखका अनुभव होता है। मुँह, पेट, पीठ, वीर्य, हड्डी, मज्जा, मांस, रक्त, उच्छवास, निःश्वास, प्राण, शरीर, जन्म और मरण आदि सभी बातें राजामें भी दूसरोंके समान ही हैं। फिर वह विशिष्ट बुद्धि रखनेवाले अनेक शूरवीरोंपर अकेला ही कैसे अपना प्रभुत्व स्थापित कर लेता है?
yudhiṣṭhira uvāca | tulyapāṇibhujagrīvas tulyabuddhīndriyātmakaḥ | tulyaduḥkhasukhātmā ca tulyapṛṣṭhamukhodaraḥ ||
ยุธิษฐิระตรัสว่า “ผู้ที่เรียกกันว่า ‘ราชา’ มีมือ แขน และคอไม่ต่างจากคนอื่น ปัญญาและอินทรีย์ก็เช่นเดียวกัน เขาย่อมเสวยสุขทุกข์เหมือนคนทั่วไป หลัง ใบหน้า และท้องก็หาได้แตกต่างไม่”
युधिछ्िर उवाच