#दघ2८5-> (9) शीला - 'उज्छ: कणश आदानं कणिशाद्यर्जनं शिलम् ।' कटे हुए खेतसे वहाँ गिरे हुए अन्नके दाने बीनकर लाना अथवा बाजार उठ जानेपर वहाँ बिखरे हुए अनाजके एक-एक दानेको बीन लाना “उज्छ” कहलाता है। इसी तरह धान, गेहूँ और जौ आदिकी बाल बीनकर लाना 'शिल' कहा गया है। चतुःषष्टर्याधिकत्रिशततमो< ध्याय: ब्राह्मगका नागराजसे बातचीत करके और उज्छव्रतके पालनका निश्चय करके अपने घरको जानेके लिये नागराजसे विदा माँगना ब्राह्मण उवाच आश्चर्य नात्र संदेह: सुप्रीतो5स्मि भुजड़रम । अन्वर्थोपगतैर्वाक्यि: पन्थानं चास्मि दर्शित:
Āścaryaṁ nātra saṁdehaḥ, suprīto ’smi bhujaṅgama; anvarthopagatair vākyaiḥ panthānaṁ cāsmi darśitaḥ.
พราหมณ์กล่าวว่า “ในเรื่องนี้ไม่มีสิ่งน่าพิศวง และไม่มีข้อกังขาเลย โอ้พญานาค ข้าพเจ้าปลื้มปีติยิ่งนัก ด้วยวาจาที่ถูกต้องสมเจตนา ท่านยังได้ชี้หนทางให้ข้าพเจ้าด้วย”
ब्राह्मण उवाच