Prāyaścitta-vidhāna: Tapas, Dāna, Vrata, and Proportional Expiation (प्रायश्चित्तविधानम्)
विष्ठा वार्धुषिकस्यान्नं गणिकान्नमथेन्द्रियम् । मृष्यन्ति ये चोपपतिं स्त्रीजितान्नं च सर्वश:,“व्याजखोरका अन्न विष्ठाके समान है और वेश्याका अन्न वीर्यके समान। जो अपनी सत्रीके पास किसी उपपतिका आना सह लेते हैं, उन कायरोंका तथा सदा स्त्रीके वशीभूत रहनेवाले पुरुषोंका अन्न भी वीर्यके ही तुल्य है
อาหารของผู้กินดอกเบี้ยเปรียบดังอุจจาระ และอาหารของหญิงคณิกาเปรียบดังน้ำกาม ผู้ใดยอมให้ชายชู้ (อุปปติ) มาหาภรรยาตน และผู้ใดตกอยู่ใต้อำนาจสตรีอยู่เสมอ—อาหารของผู้นั้นก็กล่าวว่าเสมอน้ำกามเช่นกัน
व्यास उवाच