अध्याय ३५१ — उञ्छवृत्ति-व्रतसिद्धेः मानुषस्य परमगतिः
Sūrya–Nāga Dialogue on the Perfected Gleaner-Ascetic
एतद् व: कथितं सर्व यन्मां पृच्छत पुत्रका: । पूर्वजन्म भविष्यं च भक्तानां स्नेहतो मया,'पुत्रो! तुमलोग मुझसे जो कुछ पूछते थे, वह सब मैंने तुम्हें कह सुनाया। तुम गुरुभक्त शिष्योंके स्नेहवश ही मैंने यह अपने पूर्वजन्म और भविष्यका वृत्तान्त तुम्हें बताया है!
ดูก่อนบุตรทั้งหลาย! สิ่งใดที่พวกเจ้าถามเรา เราได้กล่าวเล่าให้ครบถ้วนแล้ว ด้วยความเอ็นดูต่อศิษย์ผู้ภักดีต่อครู เราจึงบอกเล่าเรื่องชาติก่อนและสิ่งที่จะมาถึงในภายหน้าแก่พวกเจ้าด้วย
वैशम्पायन उवाच